गोदान – भाग 12

अंतिम भाग में मरणासन्न होरी एक ब्राह्मण को प्रतीकात्मक ‘गोदान’ करने के लिए फिर कर्ज़ लेता है। वह गाय का स्वप्न लिए ही मर जाता है और धनिया संघर्ष जारी रखने का संकल्प लेती है, उपन्यास किसानों के शोषण की निन्दा और उनके स्वाभिमान का चित्रण करता है.

हिन्दी English