ईदगाह

चार वर्ष का अनाथ हमीद ईद के मेले में तीन पैसे लेकर जाता है। दूसरे बच्चे खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं; हमीद लालच से बचते हुए अपनी दादी अमीना के लिए चिमटा खरीदता है ताकि रोटी बनाते समय उनके हाथ न जलें। दोस्त उसका मज़ाक उड़ाते हैं, मगर दादी उसकी समझदारी और त्याग पर भाव‑विभोर हो जाती हैं.

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