ज्योति

ज्योति कहानी में विधवा बूटी अपने दिवंगत पति के कर्ज़ और गरीबी से जूझते हुए अपने बड़े बेटे मोहन पर क्रोध निकालती है; वह छोटी‑छोटी बातों पर उसे मारती है लेकिन मोहन सहनशीलता से परिवार का सहारा बनता है। अंत में बूटी को अहसास होता है कि उसका बेटा ही उसकी ‘ज्योति’ है। कहानी विधवाओं की कठिनाइयों और बच्चों की दृढ़ता को दर्शाती है.

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