हज‑ए‑अकबर

अब्बासी (अन्ना) ने सबीर और शकीरा के बेटे नसीर को पाला है। शकीरा के संदेह के कारण अब्बासी को निकाल दिया जाता है और वह हज पर जाने का निर्णय लेती है। उसके जाने के बाद नसीर गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। सबीर मानता है कि केवल अब्बासी की ममता ही उसे बचा सकती है और स्टेशन से उसे लौटा लाता है। अब्बासी हज छोड़कर लौट आती है और बच्चे को गोद में लेते ही वह अच्छा हो जाता है। सबीर कहता है कि उसने एक जीवन बचाकर असली हज‑ए‑अकबर कर लिया.

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