All Seasons

Season 1

  • S01E01 गोदान – भाग 1

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    होरी महतो और उसकी पत्नी धनिया गाय का स्वप्न देखते हैं। वह पड़ोसी भोला से उधार लेकर गाय खरीदते हैं और साधु को भोजन कराने का संकल्प लेते हैं.

  • S01E02 गोदान – भाग 2

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    होरी का भाई हीरा ईर्ष्या में गाय को ज़हर दे देता है; होरी और धनिया मुआवज़ा चुकाने के लिए कर्ज़ लेते हैं, गरीबी बढ़ती है पर गोदान की आस बनी रहती है.

  • S01E03 गोदान – भाग 3

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    गोबर विधवा झुनिया से प्रेम करता है; झुनिया गर्भवती हो जाती है। पंचायत जुर्माना लगाती है और सामाजिक बहिष्कार करता है। गोबर शहर भाग जाता है; होरी-धनिया झुनिया को घर में रख लेते .

  • S01E04 गोदान – भाग 4

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    जुर्माने और सामाजिक दबाव से उनका खेत-खलिहान बिकता जाता है। होरी-धनिया झुनिया को बहू के रूप में स्वीकार करते हैं, पर कर्ज़ और बढ़ जाता है.

  • S01E05 गोदान – भाग 5

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    कथा ग्रामीण गरीबी के साथ शहरी पात्रों (राय साहब, मालती) को जोड़ती है। होरी ज़मींदार के कारिंदों की चंगुल में मज़दूर बन जाता है; शोषण और वर्ग भेद उभरते हैं.

  • S01E06 गोदान – भाग 6

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    शहर में गोबर कारखाने में काम कर कमाने लगता है और परिवार को सहारा देने की सोचता है। गाँव में होरी कर्ज़ चुकाने में जुटा रहता है और धनिया घर सम्भालती है.

  • S01E07 गोदान – भाग 7

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    झुनिया एक बेटे को जन्म देती है। धनिया पुजारी के शोषण का विरोध करती है पर स्थिति में सुधार नहीं होता; होरी बैल बेच देता है और गाय का सपना और दूर हो जाता है.

  • S01E08 गोदान – भाग 8

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    सूखा पड़ने से फसल बर्बाद होती है। होरी ज़मींदार के खेतों में बेगार करता है और महसूल वसूलने वाले कर्मचारियों को रिश्वत देता है; उसका स्वास्थ्य गिरता है.

  • S01E09 गोदान – भाग 9

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    होरी बेटी सोना की शादी के लिए दहेज़ की व्यवस्था करने को और कर्ज़ लेता है। दूसरी ओर, शहर के बुद्धिजीवी सुधार की बातें करते हैं; गाँव में गरीबी गहराती है.

  • S01E10 गोदान – भाग 10

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    गोबर बचत लेकर लौटता है और खेत छुड़ाने की सोचता है, पर होरी वह पैसा कर्ज़ और दहेज़ चुकाने में लगा देता है। यह उसका कर्तव्यबोध दिखाता है.

  • S01E11 गोदान – भाग 11

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    कर न भरने पर उस पर फिर जुर्माना लगता है; वह और अधिक मेहनत करता है। बीमारी से वह कमजोर हो जाता है और पुलिस के डर से छुपता है.

  • S01E12 गोदान – भाग 12

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    अंतिम भाग में मरणासन्न होरी एक ब्राह्मण को प्रतीकात्मक ‘गोदान’ करने के लिए फिर कर्ज़ लेता है। वह गाय का स्वप्न लिए ही मर जाता है और धनिया संघर्ष जारी रखने का संकल्प लेती है, उपन्यास किसानों के शोषण की निन्दा और उनके स्वाभिमान का चित्रण करता है.

  • S01E13 निर्मला – भाग 1

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    निर्मला का रिश्ता भुवन मोहन से तय होता है पर पिता उदयभानु लाल की मृत्यु के बाद मां कल्याणी दहेज न दे पाने के कारण उसे विधुर मुंशी तोताराम से ब्याह देती है.

  • S01E14 निर्मला – भाग 2

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    निर्मला नये घर में अपनापन खोजती है। वह पति के बड़े बेटे मानसाराम से मित्रता कर लेती है, जो उम्र में थोड़ा ही छोटा है। लोगों की बातें सुनकर तोताराम को संदेह होने लगता है.

  • S01E15 निर्मला – भाग 3

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    शक बढ़ जाने पर तोताराम मानसाराम को होस्टल भेज देता है। मानसाराम बीमार पड़ जाता है और घर की याद में तड़पता है; निर्मला छिपकर उसे पैसे और पत्र भेजती है.

  • S01E16 निर्मला – भाग 4

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    मानसाराम बीमारी और उपेक्षा से मर जाता है। तोताराम बहुत देर से अपनी भूल समझता है और निर्मला को दोष देता है। यह दुर्घटना परिवार में दरारें बढ़ा देती है.

  • S01E17 निर्मला – भाग 5

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    संदेह के चलते तोताराम अपने अन्य पुत्रों जिया और सियाराम पर भी शक करने लगता है। घर में कलह बढ़ती है और निर्मला की शारीरिक व मानसिक हालत बिगड़ती है.

  • S01E18 निर्मला – भाग 6

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    अंत में तोताराम को निर्मला की निष्कलंकता का एहसास होता है, परंतु बहुत देर हो चुकी होती है। निर्मला गंभीर रूप से बीमार होकर मर जाती है। कहानी दहेज प्रथा और बेमेल विवाह की बुराइयों को उजागर करती है.

  • S01E19 ईदगाह

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    चार वर्ष का अनाथ हमीद ईद के मेले में तीन पैसे लेकर जाता है। दूसरे बच्चे खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं; हमीद लालच से बचते हुए अपनी दादी अमीना के लिए चिमटा खरीदता है ताकि रोटी बनाते समय उनके हाथ न जलें। दोस्त उसका मज़ाक उड़ाते हैं, मगर दादी उसकी समझदारी और त्याग पर भाव‑विभोर हो जाती हैं.

  • S01E20 कफ़न

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    कामचोर चमड़िया घीसु और माधव अपनी बहू बुधिया की प्रसव‑पीड़ा की परवाह न कर आलू सेंकते रहते हैं। बुधिया की मृत्यु हो जाती है। दोनों दाह‑संस्कार के लिए गाँव से पैसे माँगते हैं लेकिन उस पैसे से शराब और भोजन कर लेते हैं। वे तर्क देते हैं कि पेट भर खाना कफ़न से ज़्यादा जरूरी है.

  • S01E21 ज्योति

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    ज्योति कहानी में विधवा बूटी अपने दिवंगत पति के कर्ज़ और गरीबी से जूझते हुए अपने बड़े बेटे मोहन पर क्रोध निकालती है; वह छोटी‑छोटी बातों पर उसे मारती है लेकिन मोहन सहनशीलता से परिवार का सहारा बनता है। अंत में बूटी को अहसास होता है कि उसका बेटा ही उसकी ‘ज्योति’ है। कहानी विधवाओं की कठिनाइयों और बच्चों की दृढ़ता को दर्शाती है.

  • S01E22 सवा सेर गेहूँ

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    निर्धन किसान शंकर साधु को भोजन कराने के लिए पुरोहित से सवा सेर गेहूँ उधार लेता है। वह फसल आने पर मूल से अधिक लौटाता है, फिर भी पुरोहित ब्याज और सूद पर सूद माँगता है। सात साल बाद शंकर समझता है कि उसने असली उधार से कई गुना चुका दिया है और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाता है.

  • S01E23 पूस की रात

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    बटाईदार किसान हल्कू और उसकी पत्नी मुन्नी कम्बल के लिए पैसे जोड़ते हैं लेकिन लगान चुकाना पड़ता है। ठिठुरती रात में हल्कू बिना कम्बल के खेत की रखवाली करता है और अपने कुत्ते जबरा के साथ आग तापता है। जब नीलगाय खेत में घुसती हैं, ठंड से कांपता हल्कू उन्हें भगाने नहीं जाता और फसल नष्ट हो जाती है। सुबह मुन्नी नाराज़ होती है, लेकिन हल्कू खुश है कि अब उसे ऐसी ठंडी रातें नहीं झेलनी पड़ेंगी.

  • S01E24 ठाकुर का कुआँ

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    नीची जाति के जोखू और गंगी का कुआँ गंदा होने से पीने योग्य नहीं है और ठाकुर के कुएँ पर उन्हें पानी भरने नहीं दिया जाता। गंगी रात में चोरी‑छिपे ठाकुर के कुएँ से पानी भरती है, पर ठाकुर के आने की आहट से घड़ा गिर जाता है और वह डर से भाग जाती है। कहानी छुआछूत और पानी जैसे मौलिक अधिकार से वंचित करने की कुरीति की पोल खोलती है.

  • S01E25 नमक का दारोगा

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    बिना शुल्क के नमक तस्करी करने वाले धनाढ्य पंडित अलोपीदीन को पकड़ते हैं और उसकी रिश्वत ठुकरा देते हैं। अदालत अमीर के पक्ष में जाकर वंशीधर को निलंबित कर देती है, लेकिन बाद में अलोपीदीन उनकी ईमानदारी से प्रभावित होकर उन्हें अपना मुनीम बनाता है, यह दर्शाता है कि निष्ठा अंततः पुरस्कृत होती है.

  • S01E26 हज‑ए‑अकबर

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    अब्बासी (अन्ना) ने सबीर और शकीरा के बेटे नसीर को पाला है। शकीरा के संदेह के कारण अब्बासी को निकाल दिया जाता है और वह हज पर जाने का निर्णय लेती है। उसके जाने के बाद नसीर गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। सबीर मानता है कि केवल अब्बासी की ममता ही उसे बचा सकती है और स्टेशन से उसे लौटा लाता है। अब्बासी हज छोड़कर लौट आती है और बच्चे को गोद में लेते ही वह अच्छा हो जाता है। सबीर कहता है कि उसने एक जीवन बचाकर असली हज‑ए‑अकबर कर लिया.

  • S01E27 बूढ़ी काकी

    • August 1, 2004
    • Doordarshan National

    बूढ़ी काकी नामक वृद्धा अपनी संपत्ति अपने भतीजे पंडित बुद्धिराम को दे देती है और बदले में पालन‑पोषण का भरोसा पाती है, लेकिन बुद्धिराम व उसका परिवार उसे उपेक्षित रखते हैं और वह अक्सर भूखी रहती है। विवाह‑भोज के समय वह जूठे पत्तलों में से खाना उठाती है। बहू रूपा और नातिन लाडली को दया आती है और वे उसे प्रेम से भोजन कराती हैं। कहानी संपत्ति ले लेने के बाद बुजुर्गों की उपेक्षा और मानवीय सहानुभूति का संदेश देती है.